अज्ञानता के चलते हम क्रिसमस डे चले मनाने

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हर साल 25 दिसंबर को क्रिसमस डे के रूप में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, इस दिन ईसा मसीह का जन्म हुआ था, जिन्हें ईसाई धर्म के लोग ईश्वर का पुत्र मानते हैं। हम किसी धर्म का विरोध नहीं करते,लेकिन सिख समुदाय द्वारा दिखाए गए शौर्य और सर्वोच्च बलिदान की कभी चर्चा नहीं की जाती । जी हा हम बात कर रहे है सिखों के 10वे गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के लखते ए जिगर चार साहिबजादो कि नाम बाबा अजीत सिंह जी उम्र 17 वर्ष बाबा जुझार सिंह जी उम्र 15 वर्ष,बाबा जोरावर सिंह जी उम्र9 वर्ष बाबा फ़तेह सिंह जी उम्र 7 वर्ष व माता गुजर कौर जी के बलिदान को हम कैसे भूल सकते है , हलाकि हममें से बहुत से लोग इसके बारे में नहीं जानते हैं। या हम अक्सर इसे अनदेखा कर देते हैं, या तो अज्ञानता के कारण या हमें इसके बारे में बताया ही नहीं गया है। अनिवार्य रूप से 21 दिसंबर से शुरू होने वाले पूरे सप्ताह पर चर्चा की जानी चाहिए।

गुरु गोविंद सिंह जी के लखते ए जिगर छोटे साहिबज़ादे बाबा जोरावर सिंह जी उम्र 9 वर्ष बाबा फ़तेह सिंह जी उम्र 7 वर्ष और माता गुजर कौर जी को जालिम सूबे सरहन्द वजीद खान ने ठन्डे बुर्ज में 2 दिन कैद कर धर्म परिवर्तन कराने के लिए अनेको जुल्म किये लेकिन जब दोनों छोटे साहिबज़ादो नहीं माने तो जालिम सूबे ने दोनों साहिबज़ादो को निहो में चीनवा कर शाहिद कर दिया… वही दोनों बड़े साहिबजादो की बात रहे तो व कच्ची गढ़ी से 10 लाख मुग़ल सेना से लड़ते हुए शाहिदी पा गये.. बड़े साहिबजादो बाबा अजीत सिंह जी बाबा जुझार सिंह जी मैदाने जंग में दुश्मनों के शक्के छुड़ाते देख सरबंशदानी श्री गुरु गोविन्द सिंह महाराज ने कहा की,, सवा लाख से एक लड़ाऊं, चिड़ियन ते मैं बाज तुड़ाऊं, तबै गुरु गोबिंद सिंह नाम कहाऊं. आपको बता दे गुरु गोविन्द सिंह जी महाराज के चारों साहिबजादे सहित 21 दिसंबर से लेकर 28 दिसंबर तक सरसा नदी व चमकोर यूद्ध के दौरान सैकड़ो सिख भी शहीद हो गये। लेकिन दुर्भाग्य पूर्ण हम क्रिसमस डे मनाने में इस कदर मग्न हो गए की धर्म,जुल्म के विरुद्ध अपनी जान कुर्बान करने वाले चार साहिबजादो को हम भुलाते जा रहे है

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