
हरिद्वार।
हरिद्वार के प्रतिष्ठित व्यवसायी करमजीत सिंह खैरा के साथ कथित तौर पर डीजीएम हुंडई शोरूम, हरिद्वार द्वारा की गई धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद ऑटोमोबाइल सेक्टर में हड़कंप मच गया है। नई कार खरीदने के सपने के साथ शोरूम पहुंचे कारोबारी को ऐसा झटका लगा, जिसने बड़े शोरूमों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार करमजीत सिंह खैरा ने दो माह पूर्व डीजीएम हुंडई, हरिद्वार से क्रेटा कार खरीदी। कार मिलने के 10 दिन बाद जब उन्होंने रजिस्ट्रेशन की जानकारी मांगी, तो शोरूम कर्मचारियों ने टालमटोली शुरू कर दी। कई चक्कर लगवाने के बाद शोरूम प्रबंधन ने यह कहकर मामला दबाने की कोशिश की कि गलती से इसी मॉडल की एक अन्य गाड़ी का रजिस्ट्रेशन किसी दूसरे ग्राहक के नाम हो गया है और एक माह में त्रुटि सुधार दी जाएगी।
शोरूम की बातों पर भरोसा कर करमजीत सिंह खैरा लौट आए, लेकिन एक माह से अधिक समय बीतने के बावजूद न तो रजिस्ट्रेशन हुआ और न ही कोई ठोस जवाब मिला। इसी बीच उन्हें पंजाब यात्रा पर जाना पड़ा, तो शोरूम ने जल्दबाज़ी में एक आरसी थमा दी।
फास्टैग पर खुला कड़वा सच
यात्रा के दौरान जब करमजीत सिंह खैरा ने फास्टैग बनवाने के लिए टोल प्लाज़ा पर गाड़ी रोकी, तब उनके सामने एक ऐसा सच आया जिसने उनके पैरों तले जमीन खिसका दी। जांच में सामने आया कि जिस गाड़ी को शोरूम ने जून माह में नई बताकर बेचा, वह गाड़ी दो माह पहले ही किसी अन्य ग्राहक को बेची जा चुकी थी।
इतना ही नहीं, पहले ग्राहक के बैंक लोन में परेशानी आने पर संबंधित बैंक ने वह गाड़ी जब्त कर शोरूम से सेटलमेंट के बाद वापस कर दी थी। इसी जब्त की गई गाड़ी को शोरूम ने सच्चाई छिपाकर, नई गाड़ी बताकर करमजीत सिंह खैरा को बेच दिया।
ग्राहक के साथ खुला धोखा
सारी हकीकत सामने आने के बाद करमजीत सिंह खैरा को यह स्पष्ट हो गया कि शोरूम द्वारा उनके साथ सुनियोजित धोखाधड़ी की गई है। एक प्रतिष्ठित ब्रांड के शोरूम से इस तरह की कथित हरकत ने आम ग्राहकों की सुरक्षा और भरोसे पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
ग्राहकों के लिए चेतावनी
यह मामला केवल एक व्यक्ति की परेशानी नहीं, बल्कि हर उस ग्राहक के लिए चेतावनी है जो बड़े शोरूम और नामी ब्रांड पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेता है। विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन खरीदते समय चेसिस नंबर, इंजन नंबर, निर्माण तिथि, बीमा और रजिस्ट्रेशन की पूरी जांच बेहद जरूरी है।
अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग और प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्या कार्रवाई करता है, और क्या पीड़ित कारोबारी को न्याय मिल पाता है या नहीं।

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