केदारनाथ चुनाव बना प्रतिष्ठा का सवाल

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केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों ने जहां नामांकन कर दिया है, तो वहीं केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव बीजेपी और कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव बन गया है …. चुनावी प्रतिष्ठा को लेकर देखिए हमारी ये खास रिपार्ट।

केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवारों ने नामांकन कर दिया है .. बीजेपी की ओर से आशा नौटियाल और कांग्रेस की ओर से मनोज रावत ने नामांकन कर दिया है.. दोनों उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला आंका जा रहा है … वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा संगठन के लिए भी यह चुनाव किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है … क्योंकि सरकार के रहते एक और उपचुनाव ना तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हारना चाहेंगे और ना ही भाजपा संगठन…. मुकाबला भले ही बीजेपी और कांग्रेस उम्मीदवार के बीच हो लेकिन सवाल कई लोगों की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा हुआ है … बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी की प्रतिष्ठा से भी जुड़कर यह चुनाव देखा जा रहा है .. क्योंकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा मंगलौर और बद्रीनाथ का उप चुनाव हार चुकी है ..तो वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में भी दोनों उपचुनाव पार्टी हार गई … गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी के लिए भी यह चुनाव प्रतिष्ठा का चुनाव है .. क्योंकि गढ़वाल लोकसभा सीट में दूसरा उपचुनाव उनके सांसद बनने के बाद हो रहा है, और पहले उपचुनाव गढ़वाल सीट पर बीजेपी हार चुकी है, वहीं कांग्रेस के लिए भी यह उपचुनाव प्रतिष्ठा का चुनाव है क्योंकि केदारनाथ के मुद्दे को कांग्रेस ने पूरी तरीके से भुनाने का काम किया है.. तो प्रदेश अध्यक्ष करण मेहरा नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए चुनाव प्रतिष्ठा का तो है ही.. लेकिन गणेश गोदियाल जो कि पूरा मैनेजमेंट केदारनाथ विधानसभा सीट पर कांग्रेस के लिए देख रहे हैं उनके लिए भी यह प्रतिष्ठा का चुनाव है …. क्योंकि गणेश गोदयाल पूर्व प्रदेश अध्यक्ष होने के साथ गढ़वाल लोकसभा सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार भी रहे हैं साथ ही पर्यवेक्षक के नाते चुनाव को लीड भी कर रहे हैं। हालांकि भाजपा की माने तो केदारनाथ विधानसभा सीट बीजेपी की है क्योंकि शैला रानी रावत के निधन से यह सीट खाली हुई है, शैला रानी रावत के निधन से खाली हुई सीट पर भाजपा ने महिला उम्मीदवार आशा नौटियाल को ही उम्मीदवार बनाया है जो की दो बार भाजपा की ओर से विधायक रही है, तो एक बार उन्हें भाजपा के टिकट पर हार मिली है, 2017 में टिकट न मिलने पर पार्टी से बगावत का निर्दलीय चुनाव भी लड़ चुकी है… वहीं पांचवा चुनाव यह आशा नौटियाल का है। महिला उम्मीदवार को उतार कर भाजपा ने एक तीर से कई निशाने साधने का काम किया है पहले तो यही केदारनाथ की जनता महिला उम्मीदवारों पर ज्यादा विश्वास करती है 2002, 2007, 2012, और 2022 के विधानसभा चुनाव में केदारनाथ की जनता ने महिला उम्मीदवार को विधायक बनाया है ।केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव बीजेपी जीते या कांग्रेस जीते दोनों के लिए संजीवनी का काम करेगा, क्योंकि बीजेपी यदि अगर चुनाव जीती है तो लगेगा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नेतृत्व में जो काम चल रहे हैं, उन पर जनता को भरोसा है, तो वहीं कांग्रेस चुनाव जीती है तो लगेगा कि कांग्रेस का जन आधार राज्य में बढ़ रहा है,

केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव बीजेपी जीते या कांग्रेस जीते दोनों के लिए संजीवनी का काम करेगा, क्योंकि बीजेपी यदि अगर चुनाव जीती है तो लगेगा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नेतृत्व में जो काम चल रहे हैं, उन पर जनता को भरोसा है, तो वहीं कांग्रेस चुनाव जीती है तो लगेगा कि कांग्रेस का जन आधार राज्य में बढ़ रहा है

कुल मिलाकर देखें तो केदारनाथ चुनाव जिस तरीके से कई नेताओं की प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है … ऐसे में देखना यही होगा कि आखिरकार केदारनाथ की जनता किन नेताओं की प्रतिष्ठा को बचाने का काम करती है और किन नेताओं की प्रतिष्ठा पर प्रश्न चिन्ह लगाती है।

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