धामी सरकार को गिराने की बात पर सियासत गर्म

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उमेश का बयान राजनैतिक गलियारों मे चर्चा

उत्तराखंड राज्य में सत्तासीन धामी सरकार पर भी सरकार गिरने का खतरा मंडराने लगा है.. और यह बात हम नहीं बल्कि गैरसैंण में आयोजित मानसून सत्र के दौरान निर्दलीय विधायक उमेश कुमार शर्मा ने कही … जिसमें उन्होंने कहा कि 500 करोड़ की एक मोटी रकम सरकार को गिराने के लिए रखी गई थी… निर्दलीय विधायक के इस बयान के बाद.. बीजेपी हो या कांग्रेस दोनों ही एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करने लगे हैं… सरकार गिराने की साजिश पर निर्दलीय विधायक के बयान के बाद अब सत्ता पक्ष ने नेताओं ने बड़ी बड़ी दलीलें देना शुरू कर दिया है .. भाजपा नेताओं की दलीलों के बाद अब एक नई बहस शुरू हो गई है .. जिसमे पक्ष और विपक्ष अब पूछने लगा है की सत्ता पक्ष के पास सारे इंतजाम है खुफिया एजेंसियां हैं सरकारी तंत्र है आखिर उसे सरकार गिराने की साजिश की भनक नहीं लगी … और निर्दलीय विधायक को यह पता चल जाता है कि धामी की सरकार पर भी खतरा मंडराने लगा है। इसलिए अब निर्दलीय विधायक से भी इस खतरे के बाबत सबूत मांगने की मांग जोर पकड़ने लगी है।

निर्दलीय विधायक उमेश कुमार शर्मा ने कहा कि राज्य में एक बार फिर बाहरी ताकत है सरकार को अस्थिर करने में जुटी है इसके खिलाफ सभी लोगों को एक होना चाहिए। जबकि भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि अगर निर्दलीय विधायक ने यह बात कही है तो उन्हें साक्षी देने चाहिए.. क्योंकि सदन कोई भाषण देने का अड्डा नही है .. सदन की अपनी मर्यादा और गरिमा होती है।

विपक्षी पार्टी भी अब सत्ताधारी दल से सवाल पूछने लगी है कि उनकी तरफ से क्या कुछ करवाई इस मामले पर की जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी इशारों ही इशारों में भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अब कांग्रेस भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से ही सवाल पूछ सकती है.. क्योंकि सत्तासीन सरकार के मुख्यमंत्री इस बात को स्वीकार कर चुके हैं। कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा दसोनी ने कहा सरकार के लोग निर्दलीय विधायक की बात को गंभीरता से नहीं ले रहे है .. जबकि निर्दलीय विधायक का यह बयान सरकार की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा है।

उत्तराखंड में सत्तासीन सरकार को गिराने का यह पहला मामला नहीं है .. बल्कि इससे पहले भी हरीश रावत के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस की सरकार को अस्थिर करने की साजिश रची गई थी .. लेकिन तब हरीश रावत ने अपने कुशल नेतृत्व से सरकार को बचाया था .. लेकिन अब धामी सरकार के खिलाफ रची जा रही इस साजिश का पर्दाफाश होना जरूरी है ।

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