शहादत के दिनों में याद करो क़ुरबानी

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श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के लखते ए जिगर छोटे साहिबज़ादे बाबा जोरावर सिंह जी उम्र 9 वर्ष बाबा फ़तेह सिंह जी उम्र 7 वर्ष और माता गुजर कौर जी को ठन्डे बुर्ज में कैद कर जालिम सूबे सरहन्द वजीर खां ने काफी डराया, धमकाया और प्यार से भी इस्लाम कबूल करने के लिए राज़ी करना चाहा, लेकिन दोनों अपने निर्णय पर अटल थे। जब दोनों छोटे साहिबज़ादो नहीं माने तो 3से दिन जालिम सूबे ने दोनों साहिबज़ादो को दीवार में चीनवा कर शाहिद कर दिया…

वही दोनों बड़े साहिबजादो की बात करें बाबा आजीत सिंह जी उम्र 17 वर्ष व बाबा जुझार सिंह जी उम्र 13वर्ष तो दोनों सुरमे कच्ची गढ़ी में 10 लाख मुग़ल सेना से लड़ते हुए शाहिदी पा गये.. बड़े साहिबजादो बाबा जीत सिंह जी बाबा जुझार सिंह जी मैदाने जंग में दुश्मनों के शक्के छुड़ाते देख सरबंशदानी श्री गुरु गोविन्द सिंह महाराज ने कहा की,, .सवा लाख से एक लड़ाऊं, चिड़ियन ते मैं बाज़ तुड़ाऊं, तबै गुरु गोबिंद सिंह नाम कहाऊं’ आपको बता दे गुरु गोविन्द सिंह जी महाराज के चारों साहिबजादे सहित 21 दिसंबर से लेकर 28 दिसंबर तक सरसा नदी व चमकोर यूद्ध के दौरान सैकड़ो सिख भी शहीद हो गये। जिनकी क़ुरबानी ने सिखो की नीव खून से सीज दी, जिसके चलते आज भी सिख जहाँ जुर्म, जोर,धर्म व इंसानियत के लिए मरने से नहीं डरते….साथ ही सिख इतिहास में पौह का महीना (दिसंबर के मध्य की शुरुआत) बेहद उदासीनता भरा होता है. दशम पातशाह साहिब श्री गुरु गोविंद सिंह जी के परिवार का बिछड़ना, चार साहिबज़ादों और माता गुजरी जी की शहादत, ये सभी दुखद घटनाएं इस महीने में ही घटे थे, जिसके चलते सिख समाज इस महीने में कोई भी शुभ कार्य नहीं करते है

उनकी शहादत का सम्मान करने के लिए PM मोदी ने 2022 में 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाने की घोषणा की थी जिसके लिये समुचा सिख समाज इनकी सराहना करता है।

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