
उत्तरकाशी जनपद के सरनौल गांव के पांडव देव पशवा ने लगभग पौने पांच फिट का जिंदा सांप को पकड़ कर उसके साथ ढोल की थाप पर थिरकते नजर आये बाद में दुध पिलाकर जंगल में सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया है। पांडव पशवा सांप को पकड़ कर खिलौनों जैसे सांपों से खेलते नजर आए। हालांकि, सांप को देखकर या उसका नाम सुनकर ज्यादातर लोग डर जाते हैं या बेचौनी महसूस करते हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि सांपों को पकड़ने और उनसे खेलने की इस परंपरा को चमत्कारी कृत्य माना जाता है या कुछ और। हालांकि, पांडव पशवों की जिंदे सांपों के साथ नृत्य करने के पीछे की सच्चाई लोगों के लिए रहस्य बनी हुई है यह सिर्फ धार्मिक आस्था से जुड़ा है। उत्तरकाशी जनपद के विकास खंड नौगांव के सूदूरवर्ती सरनौल गांव में जब भी गांव में सांप दिखाई देता है तो सांपों से खेलने का मेला लगता है। यहां पारंपरिक खिलौनों की जगह श्रद्धालु सांपों से खेलते नजर आते हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि कैसे भय पर आस्था की जीत होती है, क्योंकि लोग दर्जनों बार इस अनोखे तरीके से सांपों के साथ अवतरित होकर नृत्य करके दुध पिलवाते है।

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