काशीपुर में आत्महत्या मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में आरोपी बनाए गए कुंदन सिंह को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने थाना आईटीआई, ऊधम सिंह नगर में दर्ज FIR संख्या 0013/2026 और उसके आधार पर दाखिल चार्जशीट को कुंदन सिंह के संबंध में रद्द कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक महरा की पीठ ने 18 अगस्त 2026 को पारित किया।
मामला जनवरी 2026 में एक व्यक्ति द्वारा आत्महत्या किए जाने से जुड़ा था। शिकायत के अनुसार मृतक और उसके भाई ने कुछ संपत्ति खरीदने के लिए दूसरे आरोपियों को चार करोड़ रुपये से अधिक की रकम दी थी, लेकिन बिक्री विलेख नहीं किया गया और रकम भी वापस नहीं की गई। इसी मामले को लेकर मृतक और उसका भाई सितंबर 2025 में थाना आईटीआई पहुंचे थे।
शिकायत में कुंदन सिंह पर मृतक और उसके पिता के साथ थाने में दुर्व्यवहार करने तथा मृतक से पांच लाख रुपये लेने का आरोप लगाया गया था। जांच के दौरान यह भी आरोप सामने आया कि कुंदन सिंह ने मृतक को धमकाया था। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से इन आरोपों को नकारते हुए कहा गया कि थाने की घटना CCTV में रिकॉर्ड है और उसमें किसी तरह के दुर्व्यवहार की पुष्टि नहीं होती।
हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित कानून और सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि केवल प्रताड़ना या आरोप पर्याप्त नहीं हैं। आरोपी की ओर से ऐसा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कृत्य होना आवश्यक है, जिससे आत्महत्या के लिए उकसाने या मजबूर करने की स्पष्ट मंशा दिखाई दे।
अदालत ने कहा कि इस मामले में उपलब्ध सामग्री BNS की धारा 108 के आवश्यक तत्वों को पूरा नहीं करती। रिकॉर्ड के आधार पर आरोपी की ओर से आत्महत्या के लिए उकसाने या आपराधिक धमकी देने की स्पष्ट मंशा साबित नहीं होती।
इसके बाद हाईकोर्ट ने कुंदन सिंह के खिलाफ दर्ज FIR और दाखिल चार्जशीट को रद्द करते हुए रिट याचिका स्वीकार कर ली।

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